सतधारू जल परियोजना का काम अधूरा, जल निगम हैंडओवर लेने बना रहा दबाव

सतधारू जल परियोजना का काम अधूरा, जल निगम हैंडओवर लेने बना रहा दबाव

बिछाई गई पाइप लाइनों का काम पड़ा गांवों में अधूरा, कई घरों में नहीं पहुंच रहा पानी

तेंदूखेड़ा. सतधारू जल परियोजना के तहत ग्राम पंचायतों में पाइपलाइन बिछाकर घर-घर पानी पहुंचाने की योजना अधूरी पड़ी है, लेकिन जल निगम के अधिकारी सरपंचों पर इसे हैंडओवर लेने का दबाव बना रहे हैं। कई गांवों में अभी तक पाइपलाइन बिछाने के लिए खोदी गई सड़कों की मरम्मत नहीं हुई है। वहीं, कई घरों तक पानी पहुंचा ही नहीं, लेकिन इसके बावजूद सरपंचों को जल कर के बिल थमा दिए गए हैं।

ग्राम पंचायत नरगुंवा की सरपंच आरती ङ्क्षसह ने बताया कि गांवों में जल आपूर्ति सही तरीके से नहीं हो रही है। सड़कें भी अभी तक मरम्मत के इंतजार में हैं। इसी तरह सहजपुर की सरपंच रचना पाल ने बताया कि कई नलों में टोटियां तक नहीं लगीं, जिससे पानी व्यर्थ बह रहा है। ग्राम पंचायत खमरिया शिवलाल के सरपंच देशराज ङ्क्षसह लोधी ने कहा कि योजना की खामियों के कारण जल आपूर्ति में अव्यवस्था है। सड़कों की मरम्मत अधूरी छोड़ दी गई है और हैंडओवर न लेने पर जल सप्लाई रोक दी गई है।

बिल वसूली व जल आपूर्ति पर विवाद: ब्लॉक सरपंच संघ की अध्यक्ष नीतू साहू ने बताया कि बिना हैंडओवर के ही ग्राम पंचायतों को 54 हजार रुपए तक के बिल दिए जा रहे हैं। पहले कहा गया था कि पानी की सप्लाई नि:शुल्क रहेगी, लेकिन अब जल कर की मांग की जा रही है। ग्राम सभा में ग्रामीणों ने हर महीने भुगतान देने की सहमति तो दी, लेकिन गरीब परिवार जल निगम द्वारा तय राशि देने में असमर्थ हैं।गर्मी में जल संकट की आशंका

गर्मी में जल संकट की आशंका

जल निगम अधिकारी राज का कहना है कि योजना की जिम्मेदारी 10 साल तक उनकी रहेगी, लेकिन संचालन ग्राम पंचायतों को करना होगा। पंचायतों को जल कर नियमित रूप से जमा करना होगा, ताकि गर्मी में जल आपूर्ति प्रभावित न हो। इधर, ग्रामीणों और सरपंचों का कहना है कि जब तक जल आपूर्ति पूरी तरह सुचारु नहीं होगी, तब तक योजना को हैंडओवर नहीं किया जाएगा। इस तरह माना जा रहा है कि इस गर्मी में भी जलसंकट की समस्या गांवों में बनेगी।

जल निगम के प्रबंधक मनोज राज का कहना है कि जिसने पानी का उपयोग किया है, उसे ही बिल दिया जा रहा है। जिन घरों में पानी नहीं पहुंचा, वहां पंचायत को जल कर वसूलने की जरूरत नहीं है। गांवों में 60 प्रतिशत नल कनेक्शनों में टोटियां लगाई गई थीं, लेकिन ग्रामीणों ने इन्हें निकालकर बेच दिया। अब नए नियमों के तहत सभी कनेक्शन घर के अंदर लगाए जाएंगे।

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